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Monday, 21 September 2009

जे काम का तुम्हारो बाप करैगो ?

मुश्किल जी है कि अब हर आदमी अपनी अपनी जिम्मेदारियन से बचवें चाहतै. लोग-बाग जी चाहन लगे हैं कि बैठे -बिठाये सबई कछू मिल जाय, काम -काज धेला भर कौ नायं करवें परै.

कोई कोई तो ऐसेऊ आलसी दिखाई परत हैं कि बैठे बैठे इंतज़ार कर रये हैं कि कोऊ आवे और कौर म्हों में डार दे.
हर कोऊ मुफत की ही खानो चाह रहो है.
अब जी नीचे वारी तस्वीर देखौ ज़रा. जो आदमी सडक पे लाइन खींच रहो,वाने देखौ कि एक टूटी भई डाल व्हन पे डरी है. अब कौन हिलाय वाकों?
तो इननें तरकीब का निकारी , देखो ज़रा -




मूल सामग्री साभार : चित्र - सुरेश बाबू , पोस्ट- जाने भी दो यारो!