Friday, 25 May 2012


महंगौ है गऔ तेल  

फिर तें महंगौ है गऔ तेल, कार में अब नांय बैठौंगो  अब नांय बैठौंगो , कार में अब नांय बैठौंगो फिर तें महंगौ है गऔ तेल, कार में अब नांय बैठौंगौ.

·         तेल कौ पैसा मोपे नांय,  अब हमें कौउ पूछत नांय, कार अब हमें सुहावत नांय                 देख देख कें कुढ़ों  जाय में कैंसे बैठौंगो ?

·फिर तें महंगौ है गऔ तेल, कार में अब नांय बैठौंगो



·         संग मेरे ठाड़ी गूजरिया, पहन के धानी चूनरिया, के पिक्चर ले चल सांवरिया

·पैदल कैंसे जांऊ मैं पिक्चर  घर ई बैठौंगो,                                             फिर तें महंगौ है गऔ तेल, कार में अब नांय बैठौंगो                                                                                                                     

·         चीख रये सब टीवी अखबार, बढ़ गयी महंगाई दस बार, जे गूंगी बेहरी है सरकार             जनता बिल्कुल्ल है लाचार, देश में मच गऔ हाहाकार                                     दफ्तर मेरो दूर मैं, रस्ता कैसे पाटौंगौ ?

·फिर तें महंगौ है गऔ तेल, कार में अब नांय बैठौंगो



·          कि नेता मज़े करें दिन रात , विन्हे महंगाई नांय सतात, कीमतें फिर फिर हैं बढ़ जात,        अबकी बारी सोच लयौ है वोट ना डारोंगौ  

फिर तें महंगौ है गऔ तेल, कार में अब नांय बैठौंगो  अब नांय बैठौंगो,कार में अब नांय बैठौंगो  फिर तें महंगौ है गऔ तेल, कार में अब नांय बैठौंगौ.















Tuesday, 14 February 2012

डा. स्वामी का जयपुर में भाषण

Feb 12, 2012 डॉ स्वामी बताते हैं की संस्कृति ही सामाजिक रचना का आधार है एवं भारतवर्ष की संस्कृति सबसे पुराचन, श्रेष्ठ एवं सिद्ध है । इसे सनातन धर्म भी कहते हैं । ८ सदियों के इस्लामिक एवं २ सदियों के ईसाई राज के होते हुए भी सनातनी संघर्ष करते रहे , तभी आज भारत में ८३ % सनातनी हैं । डॉ स्वामी देश के सनातनी, वीर पुत्रियों एवं पुत्रों के बारे में बताते हैं । उन्होंने देश के गौरवपूर्ण संस्कृति का एक व्याख्यान दिया ।

उन्होंने कहा की यदि भारत का विलुप्त मान इस विश्व में वापस लाना है तो सनातन धर्म को पुनर्जीवित करना पड़ेगा । इस देश में धर्म -निरपेक्षता ने हिन्दुओं के साथ पक्षपात मात्र किया है । यह हिन्दू संस्कृति ही भारत की पहचान है । डॉ स्वामी आरक्षण के विषय पे भी चर्चा करते हैं एवं बताते हैं की तुष्टिकरण की नीति ने इस व्यवस्था को विकृत कर दिया है । देश की बाकी समस्याओं पे चर्चा करते हुए डॉ स्वामी ने कश्मीर की बात की । आगे वो राम मंदिर की समस्या का भी हल सुझाते हैं ।डॉ स्वामी के पास देश के भविष्य को ले कर एक उत्तम दृष्टीकोण है जो देश के पुनरुत्थान के लिए आवश्यक है । व्याख्यान ख़त्म करते हुए उन्होंने २-जी के विषय पे भी व्यंग्य किया ।
http://www.youtube.com/watch?v=2E0u-_jAQUU

Tuesday, 3 January 2012

नया वर्ष शुभ हो

हैप्पी न्यू ईयर 2012

नाचो गाओ मौज़ मनाओ हैप्पी न्यू ईयर
नया वर्ष है खुशी मनाओ हैप्पी न्यू ईयर

प्यार से सबको गले लगाओ हैप्पी न्यू ईयर
जो रूठा है उसे मनाओ हैप्पी न्यू ईयर

महंगा है पेट्रोल तो उसकी चिंता भी छोड़ो
पैदल पैदल ओफिस आओ हैप्पी न्यू ईयर

जो दफ्तर में काम है ज्यादा पूरा उसे करो
ओवर टाइम भूल भी जाओ हैप्पी न्यू ईयर

लोकपाल की चिंता तुम क्यों करते हो अन्ना
अनशन छोड़ो,जम कर खाओ हैप्पी न्यू ईयर

लड्डू पेड़ा महंगा, महंगी चौकलेट भी है
आधा आधा मिलकर खाओ हैप्पी न्यू ईयर

( रचयिता: डा. अरविन्द चतुर्वेदी)

Thursday, 22 September 2011

महंगौ है गयौ तेल ( ब्रज भाषा का गीत)

फिर तें महंगौ है गऔ तेल, कार में अब नांय बैठौंगो
अब नांय बैठौंगो , कार में अब नांय बैठौंगो
फिर तें महंगौ है गऔ तेल, कार में अब नांय बैठौंगौ.


तेल कौ पैसा मोपे नांय,
अब हमें कौउ पूछत नांय,
कार अब हमें सुहावत नांय
देख देख कें कुढ़ों जाय में कैंसे बैठौंगो ?
फिर तें महंगौ है गऔ तेल, कार में अब नांय बैठौंगो




संग मेरे ठाड़ी गूजरिया,
पहन के धानी चूनरिया,
के पिक्चर ले चल सांवरिया
पैदल कैंसे जांऊ मैं पिक्चर घर ई बैठौंगो,
फिर तें महंगौ है गऔ तेल, कार में अब नांय बैठौंगो

चीख रये सब टीवी अखबार,
बढ़ गयी महंगाई दस बार,
जे गूंगी बेहरी है सरकार
जनता बिल्कुल्ल है लाचार,
देश में मच गऔ हाहाकार
दफ्तर मेरो दूर, मैं रस्ता कैसे पाटौंगौ ?
फिर तें महंगौ है गऔ तेल, कार में अब नांय बैठौंगो



कि नेता मज़े करें दिन रात ,
विन्हे महंगाई नांय सतात,
कीमतें फिर फिर हैं बढ़ जात,
अबकी बारी सोच लयौ है वोट ना डारोंगौ
फिर तें महंगौ है गऔ तेल, कार में अब नांय बैठौंगो


अब नांय बैठौंगो,कार में अब नांय बैठौंगो
फिर तें महंगौ है गऔ तेल, कार में अब नांय बैठौंगौ

डा. अरविन्द चतुर्वेदी

Friday, 18 March 2011

मजे लो होली में

नाचो दे दे ताल, मजे लो होली में,
गालों मलो गुलाल, मजे लो होली में.

रंग बिरंगे चेहरों में ढून्ढो धन्नो,
घर हो या ससुराल , मजे लो होली में.

हुश्न एक के चार नज़र आयें देखो,
एनक करे कमाल , मजे लो होली में


चढे भंग की गोली ,डगमग पैर चलें,
बहकी बहकी चाल, मजे लो होली में.

ऐश्वर्या जब तुम्हे पुकारे ‘अंकल जी’,
छूकर देखो गाल, मजे लो होली में


छेडछाड में पिट सकते हो ,भैया जी,
गैंडे जैसी खाल, मजे लो होली में.



बीबी बोले मेरे संग खेलो होली,
बैठो सड्डे नाल , मजे लो होली में.

Saturday, 4 September 2010

कृष्ण जन्माष्ठमी पर विशेष छन्द



मोर के पखुअन कौ माथे पै मुकुट धारि
सांवली सलौनी छवि श्याम की सुहावती
आवती-औ-जावती मधु बन छावती
पल-पल प्रीत बन सांसन में धावती
मंद-मंद मुरली की तान सुनि भारती
आरती कान्हाजी की भारती उतारती

आरती उतारती रागिनी उचारती
मथुरा में जमुनाजी चरण पखारती
कर्म ही सुकर्म है यह सिद्ध करने के लिए
धर्म की सुरक्षा हेतु बने कृष्ण सारथी
आततायी उग्रवादी दानवों के वध हेतु
देवभूमि आज फिर कृष्ण को पुकारती।



पंडित सुरेश नीरव


( चित्र व रचना -साभार : जय लोक मंगल ब्लोग )

Friday, 11 December 2009

यू.पी के करौ चार हिस्सा, हमें देउ हमारौ बृज प्रदेश,

अब सुनौ लल्ला सौ की सूधी एक बात. तुम्हाई सुन लई भौत. अब तुम्हें सुनने परैगी हम्हाई. तुम तेलंगाना मांगौ चायें मांगौ गोरखा लैंड. हमाई बला सें. हमें जामें कछू बुराई नायं लगत. लेकिन अब हमें चूना मती लगाउ.

जब तुम सबै सब कछू बांट रये हो, तुम हम ने कौन सी तुम्हाई भैन्स खोल रखी है. का हमें नायं देउगे हमाउ हिस्सा?
का कही ? हमें का चईयें ?अरे लल्ला हमें चईयें हमाऔ बृज प्रदेश .

अब और सुनौ कि हमें कैसौ बृज प्रदेश चईयें. हमारौ जो बृज प्रदेश है वू खाली यू.पी सौं नायं निकरैगौ.
हमाये बृज प्रदेश मे यू.पी से आवेंगे आगरा,मथुरा,फिरोज़ाबाद,शिकोहाबाद,इटावा,मैनपुरी,कन्नौज,फरुखाबाद, एटा, अलीगढ़्,बुलन्दशहर के ग्यारै ज़िले, संग में आएगौ राजस्थान कौ भरतपुर ,मध्य प्रदेश के भिंड, मोरेना,ग्वालियर ज़िले. सब मिलाय कैं बनेंगे पन्द्रह ज़िले.

और सुन लेउ, जी हरित -फरित प्रदेश का बला है? का मतलब है हरित -फरित प्रदेश कौ ? हमाई संस्कृति ,हमाई सभ्यता, हमाई बोल-चाल ,हमाये संस्कार्, हमाऔ खान-पान सब तो अलग है पच्छिम यू.पी सें. हमें नायं मतलब काऊ हरित-फरित प्रदेश की मांग सें, हमें तौ अलग्गई चईयें हमाऔ बृज प्रदेश.

राधे-राधे. अब तौ लै कैंई रहेंगे. कछू करकें देख लियो.
बोलो वृन्दावन बिहारी लाल की --जै.